सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को कम करने और घायलों को ‘गोल्डन आवर’ (Golden Hour) में तुरंत चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार की PM RAHAT (Prime Minister – Road Accident Victims’ Hospitalisation and Assured Treatment) योजना एक संजीवनी साबित हो रही है। इसी कड़ी में, योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और जमीनी स्तर पर इसकी पहुंच सुनिश्चित करने के लिए 31 अक्टूबर 2026 को बिहार के औरंगाबाद स्थित योजना भवन में एक अहम जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।
अधिकारियों ने दिया बेहतर समन्वय पर जोर
जिलाधिकारी श्रीमती अभिलाषा शर्मा (भा.प्र.से.) के निर्देश पर आयोजित इस महत्वपूर्ण कार्यशाला की अध्यक्षता अपर समाहर्ता श्री अनुग्रह नारायण सिंह ने की। मंच का संचालन करते हुए जिला परिवहन पदाधिकारी (DTO) सुश्री सुनंदा कुमारी ने उपस्थित लोगों को योजना के तकनीकी और व्यावहारिक पहलुओं की विस्तार से जानकारी दी। प्रशासन ने पुलिस, परिवहन, स्वास्थ्य विभाग और आयुष्मान भारत योजना से जुड़े अस्पतालों के बीच एक मजबूत तालमेल स्थापित करने पर विशेष बल दिया है, ताकि किसी भी घायल को इलाज के लिए भटकना न पड़े।
क्या है PM RAHAT योजना और इसके मुख्य फायदे?
देश भर में 13 फरवरी 2026 को लागू की गई यह योजना मोटर वाहन दुर्घटनाओं के पीड़ितों को त्वरित राहत देने के उद्देश्य से बनाई गई है। इस योजना के तहत घायल को तुरंत मदद दी जाती है, जिसके लिए मौके पर किसी आय प्रमाण पत्र या बीमा कागजात की जरूरत नहीं होती है। कार्यशाला में बताई गई योजना की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:
- ₹1.5 लाख तक की मुफ्त चिकित्सा: सड़क हादसे में घायल व्यक्ति को अस्पताल में अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज मुहैया कराया जाएगा।
- 7 दिनों तक का कवरेज: दुर्घटना के दिन से लेकर अधिकतम 7 दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहने और उपचार का पूरा खर्च इस योजना के तहत कवर होगा।
- गोल्डन आवर में त्वरित इलाज: दुर्घटना के तुरंत बाद के अहम समय (स्वर्णिम समय) में बिना पैसों की चिंता किए सीधा इलाज शुरू करने का प्रावधान।
- सभी के लिए उपलब्ध: दुर्घटना चाहे सामान्य हो, वाहन बीमित हो या मामला ‘हिट-एंड-रन’ का हो, हर पीड़ित इस राष्ट्रीय योजना का लाभ उठाने का पात्र है।
- डिजिटल प्रक्रिया: पुलिस eDAR पोर्टल के माध्यम से डिजिटल वेरिफिकेशन पूरा करेगी, जबकि अस्पताल TMS 2.0 पोर्टल का उपयोग कर इलाज और क्लेम की प्रक्रिया को बिना किसी अनावश्यक विलंब के आगे बढ़ाएंगे।
जिले के 18 अस्पतालों की रही सक्रिय भागीदारी
बैठक में आयुष्मान भारत योजना से संबद्ध जिले के कुल 18 अस्पतालों के संचालकों ने हिस्सा लिया, जिनमें 10 सरकारी और 8 निजी अस्पताल शामिल थे। प्रशासन ने सख्त निर्देश दिए हैं कि दुर्घटना के बाद अस्पताल पहुंचने वाले किसी भी मरीज के इलाज में आर्थिक कारणों से देरी नहीं होनी चाहिए। सभी थानाध्यक्षों को भी स्पष्ट हिदायत दी गई है कि सूचना मिलते ही फौरन कार्रवाई करें और पोर्टल पर जरूरी कागजी प्रक्रिया को निर्धारित समय-सीमा के भीतर निपटाएं।
आम जनता से खास अपील: जीवन बचाने में निभाएं भूमिका
कार्यशाला के अंत में प्रशासन ने आम नागरिकों से एक भावुक और अहम अपील की। सड़क पर किसी भी व्यक्ति को घायल अवस्था में देखने पर उसे अनदेखा न करें। तुरंत डायल 112 (ERSS) पर कॉल कर एंबुलेंस बुलाएं या घायल को नजदीकी अस्पताल पहुंचाने में मदद करें। दुर्घटना के बाद समय पर मिला इलाज किसी का अनमोल जीवन बचा सकता है। सड़क सुरक्षा केवल एक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि जीवन बचाने का संकल्प है। आइए, मिलकर दुर्घटना पीड़ितों को त्वरित उपचार उपलब्ध कराने में अपनी भूमिका निभाएं।
