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मगधपोस्ट एक्सक्लूसिव बिहार की तरकारी क्रांति: अब खेत से सीधे बाजार तक पहुंचेगी किसानों की मेहनत

Published: November 2, 2026, 11:39 pm
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पटना/औरंगाबाद: बिहार के खेतों में उगने वाली सब्जियां अब केवल स्थानीय मंडियों तक सीमित नहीं रहेंगी। टमाटर, मटर, फूलगोभी और दूसरी हरी सब्जियों को बड़ी कंपनियों, आधुनिक खुदरा केंद्रों और प्रसंस्करण उद्योगों तक पहुंचाने की तैयारी है। राज्य सरकार की यह पहल सफल रही तो लाखों सब्जी उत्पादक किसानों के लिए बाजार और कमाई के नए रास्ते खुल सकते हैं।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में सहकारिता विभाग ‘तरकारी आउटलेट’ के माध्यम से किसानों को सीधे बाजार से जोड़ने की दिशा में काम कर रहा है। इसका उद्देश्य किसानों को बेहतर कीमत दिलाना और उपभोक्ताओं तक ताजी एवं गुणवत्तापूर्ण सब्जियां पहुंचाना है।

इस पहल का संदेश है—’हर थाली में बिहारी तरकारी‘। इसके पीछे केवल खुदरा दुकानें खोलने की योजना नहीं, बल्कि खेत से बाजार तक पूरी आपूर्ति व्यवस्था को बदलने की सोच है।

किसान की मेहनत का मुनाफा अब किसान तक पहुंचाने की तैयारी

बिहार के किसानों की एक बड़ी समस्या यह रही है कि अच्छी फसल होने के बावजूद उन्हें उचित कीमत नहीं मिल पाती। सब्जियां जल्दी खराब होती हैं और भंडारण की सुविधा नहीं होने के कारण किसान को अक्सर मजबूरी में कम दाम पर अपनी उपज बेचनी पड़ती है।

दूसरी तरफ, वही सब्जियां कई व्यापारिक स्तरों से गुजरकर शहरों में महंगी कीमत पर बिकती हैं। इस प्रक्रिया में किसान और उपभोक्ता के बीच बिचौलियों की भूमिका बढ़ जाती है।

सरकार अब सहकारी समितियों के माध्यम से इस दूरी को कम करना चाहती है। इसके तहत किसानों की उपज को एकत्र करके सीधे बड़ी कंपनियों, संस्थानों और खुदरा बाजारों तक पहुंचाने की व्यवस्था विकसित की जा रही है।

₹100 करोड़ के समझौते, बड़ी कंपनियों से जुड़ेगा बिहार का किसान

इस पहल का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बड़ी कंपनियों के साथ सीधे कारोबारी समझौते हैं। उपलब्ध योजना विवरण के अनुसार, करीब ₹100 करोड़ के व्यावसायिक समझौते किए गए हैं।

इनमें हिंदुस्तान यूनिलीवर, मदर डेयरी, नेचर फ्रेश, टेक्निको, जैन इरिगेशन, किविसा एग्रो और प्रकाशश्री एग्रो जैसी कंपनियों के नाम शामिल हैं।

हिंदुस्तान यूनिलीवर को वैशाली जिले के लालगंज स्थित खाद्य प्रसंस्करण केंद्र के लिए सब्जियों की आपूर्ति से जोड़ने की बात भी सामने आई है।

इस व्यवस्था में किसान सहकारी समितियों के माध्यम से अपनी उपज उपलब्ध कराएंगे और समितियां कंपनियों की मांग के अनुसार उसकी आपूर्ति करेंगी। इससे छोटे किसान भी सामूहिक रूप से बड़े खरीदारों तक पहुंच बना सकेंगे।

इस मॉडल में तीन तरह के बाजार विकसित किए जा रहे हैं:

  • B2B: बड़ी कंपनियों और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को सीधी आपूर्ति।
  • B2G: सरकारी संस्थानों को सब्जियों की आपूर्ति।
  • B2C: तरकारी आउटलेट के माध्यम से सीधे उपभोक्ताओं तक बिक्री।

गांव से राज्य स्तर तक तीन स्तरीय सहकारी व्यवस्था

इस पूरी योजना की सबसे बड़ी ताकत इसका तीन स्तरीय सहकारी ढांचा है। इसका उद्देश्य छोटे किसानों को संगठित करके उन्हें बड़े बाजारों से जोड़ना है।

पहला स्तर – प्रखंड स्तर: प्राथमिक सब्जी उत्पादक सहकारी समितियां (PVCS) गांव के किसानों से सीधे जुड़ेंगी। यहां सब्जियों का संग्रहण, धुलाई, छंटाई, ग्रेडिंग और पैकिंग होगी। किसानों को स्थानीय स्तर पर ही बिक्री की सुविधा मिलेगी।

दूसरा स्तर – क्लस्टर स्तर: क्षेत्रीय सहकारी संघ अलग-अलग प्रखंडों से सब्जियां एकत्र करेंगे। यहां बड़े पैमाने पर भंडारण, प्रसंस्करण और विपणन की व्यवस्था होगी। इसके लिए पटना में हरित, पूर्वी चंपारण में तिरहुत, दरभंगा में मिथिला, गया में मगध और भागलपुर में क्षेत्रीय सहकारी संघों की व्यवस्था की गई है।

तीसरा स्तर – राज्य स्तर: VEGFED यानी बिहार राज्य सब्जी प्रसंस्करण एवं विपणन सहकारी संघ लिमिटेड पूरे नेटवर्क का समन्वय करेगा। बड़ी कंपनियों से समझौते, बाजार विस्तार, प्रशिक्षण और विभिन्न क्षेत्रों में मांग-आपूर्ति का प्रबंधन इसकी जिम्मेदारी होगी।

इस व्यवस्था से गया या औरंगाबाद जैसे क्षेत्रों में उत्पादित सब्जियों को पटना और दूसरे बड़े बाजारों तक पहुंचाने के अवसर बढ़ सकते हैं।

200 तरकारी आउटलेट से शहरों में मिलेगी ताजी सब्जियां

इस योजना का सबसे प्रत्यक्ष हिस्सा ‘तरकारी आउटलेट‘ है। पहले चरण में बिहार के शहरी क्षेत्रों में 200 आउटलेट स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है।

प्रस्तावित मॉडल के अनुसार, प्रत्येक आउटलेट के निर्माण पर करीब 7.44 लाख रुपये खर्च होंगे। इनका आकार 15 × 10 वर्गफुट होगा और यहां स्वच्छ, वातानुकूलित वातावरण में सब्जियों की बिक्री की व्यवस्था की जाएगी।

पटना में चिड़ियाघर के गेट नंबर-2 के पास फ्लैगशिप तरकारी आउटलेट का उद्घाटन किया गया है।

तरकारी आउटलेट का उद्घाटन करते हुए माननीय मुख्यमंत्री बिहार

इन आउटलेट के माध्यम से सहकारी समितियां सीधे किसानों से सब्जियां खरीदकर उपभोक्ताओं तक पहुंचा सकेंगी। इससे किसानों को खुदरा बाजार तक पहुंच मिलेगी और ग्राहकों को ताजी सब्जियां उचित कीमत पर मिलने की संभावना बढ़ेगी।

गांवों में बनेंगे आधुनिक कोल्ड स्टोरेज और प्रोसेसिंग केंद्र

सब्जियों की बर्बादी रोकना इस योजना का दूसरा महत्वपूर्ण उद्देश्य है। इसके लिए प्रखंड, जिला और क्षेत्रीय स्तर पर सौर ऊर्जा आधारित एवं हाइब्रिड कोल्ड स्टोरेज विकसित करने की योजना है।

प्रस्तावित सुविधाओं में शामिल हैं:

  • प्रखंड स्तर: 10 मीट्रिक टन का कोल्ड रूम और 20 मीट्रिक टन का सामान्य गोदाम।
  • जिला स्तर: 25 मीट्रिक टन का कोल्ड रूम और 50 मीट्रिक टन का भंडारण गोदाम।
  • क्षेत्रीय स्तर: 5,000 मीट्रिक टन का कोल्ड स्टोरेज और 2,000 मीट्रिक टन क्षमता वाला डीप फ्रीज स्टोरेज।

इसके अलावा पटना, पूर्वी चंपारण, दरभंगा, गया और भागलपुर में बड़े प्रसंस्करण केंद्र विकसित करने की परिकल्पना है।

इन केंद्रों में सब्जियों की सफाई, ग्रेडिंग, पैकिंग, डिहाइड्रेशन और आधुनिक फ्रीजिंग की सुविधाएं भी होंगी। रेफ्रिजरेटेड वाहनों से सब्जियों को सुरक्षित तरीके से बाजार तक पहुंचाने की योजना है।

IQF तकनीक से बचेगी फसल, frozen मटर और डिहाइड्रेटेड सब्जियों की बढ़ेगी उपलब्धता

इस व्यवस्था में IQF यानी Individual Quick Freezing तकनीक भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इसके माध्यम से सब्जियों को तेजी से फ्रीज करके लंबे समय तक सुरक्षित रखने में मदद मिलती है।

उदाहरण के लिए, मटर के सीजन में जब बाजार में आवक बढ़ जाती है और कीमतें गिरने लगती हैं, तब अतिरिक्त मटर को फ्रीज करके सुरक्षित रखा जा सकता है। इसी तरह दूसरी सब्जियों का भी प्रसंस्करण करके नए उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं।

प्रस्तावित क्षेत्रीय केंद्रों में 2 मीट्रिक टन प्रति घंटे की IQF यूनिट और 6 मीट्रिक टन प्रति घंटे की प्रसंस्करण इकाई का प्रावधान है।

इससे किसानों की उपज केवल ताजी सब्जियों के बाजार पर निर्भर नहीं रहेगी, बल्कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के लिए भी उपयोगी बन सकेगी।

मगध और औरंगाबाद के किसानों को भी मिल सकता है फायदा

गया में प्रस्तावित क्षेत्रीय सहकारी केंद्र का विकास होने पर मगध क्षेत्र के किसानों के लिए बड़े बाजारों से जुड़ने के अवसर बढ़ सकते हैं।

औरंगाबाद, जहानाबाद और आसपास के इलाकों में सब्जी उत्पादन करने वाले किसानों को भी स्थानीय स्तर पर संग्रहण, ग्रेडिंग और विपणन की सुविधाओं का लाभ मिल सकता है। इसके लिए प्रखंड स्तर पर सहकारी समितियों की सक्रिय भागीदारी जरूरी होगी।

इस मॉडल से खेती के अलावा पैकिंग, परिवहन, भंडारण और प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में भी रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।

सबसे बड़ी चुनौती होगी योजना का प्रभावी क्रियान्वयन

बिहार की यह पहल निश्चित रूप से कृषि बाजार को आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन इसकी सफलता केवल घोषणाओं और भवन निर्माण से तय नहीं होगी।

किसानों को समय पर भुगतान, उनकी उपज का उचित मूल्य और सहकारी समितियों का पारदर्शी संचालन सुनिश्चित करना होगा। कोल्ड स्टोरेज और प्रसंस्करण केंद्रों को नियमित रूप से चलाना भी उतना ही जरूरी है।

इसी तरह 200 तरकारी आउटलेट पर लगातार सब्जियों की उपलब्धता और उचित कीमत बनाए रखना भी बड़ी जिम्मेदारी होगी।

बिहार के लिए यह केवल सब्जियों की बिक्री का नया मॉडल नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का अवसर है। यदि ₹100 करोड़ के समझौते, प्रस्तावित कोल्ड चेन और तरकारी आउटलेट प्रभावी तरीके से जमीन पर उतरते हैं, तो राज्य का किसान स्थानीय मंडियों की सीमाओं से बाहर निकलकर बड़े बाजारों का हिस्सा बन सकता है।

कल तक जिस किसान को अपनी सब्जी बेचने के लिए मंडी में खरीदार तलाशना पड़ता था, आने वाले समय में उसकी उपज सीधे बड़ी कंपनियों और शहरों के उपभोक्ताओं तक पहुंच सकती है।

‘हर थाली में बिहारी तरकारी’ का सपना तभी पूरा होगा, जब खेत में मेहनत करने वाले किसान को उसकी उपज का सही मूल्य और सम्मान मिलेगा।